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मानवीय संवेदनाओं का आधार: कामायनी की आधुनिक प्रासंगिकता

डॉ. नवीन कुमार चौबे
Published June 15, 2026, Volume 1, Year 2026

Abstract

जयशंकर प्रसाद की कालजयी काव्य-रचना कामायनी हिंदी साहित्य में एक ऐसी रचना है जो न केवल सौंदर्य और दर्शन का समुचित समन्वय प्रस्तुत करती है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की गहन व्याख्या भी करती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में कामायनी के माध्यम से व्यक्त मानवीय संवेदनाओं की आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। कामायनी में वर्णित प्रतीकात्मक पात्रों-श्रद्धा, इड़ा और मनु-के माध्यम से प्रस्तुत भावनात्मक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक संघर्षों को आधुनिक युग की समस्याओं, जैसे मानसिक तनाव, संबंधों का विघटन, आत्मकेन्द्रिता और मूल्यह्रास, के आलोक में समझा जाए। शोध में साहित्यिक समीक्षा, प्रतीकात्मक विश्लेषण और तुलनात्मक पद्धति का प्रयोग करते हुए यह स्थापित किया गया कि कामायनी की संवेदनाएँ कलातीत हैं। श्रद्धा प्रेम, आस्था और करुणा की प्रतिनिधि है, जबकि इड़ा बुद्धि, विवेक और तर्क की। मनु का चरित्र आधुनिक मानव के अंतःद्वंद्व का प्रतीक है जो भावना और तर्क के बीच संतुलन की खोज करता है। यह शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि कामायनी केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि आधुनिक मानव-चेतना के संकटों और समाधान का दार्शनिक दस्तावेज है। नारी चेतना, सांस्कृतिक पुनर्निर्माण तथा संवेदनशील मानव मूल्यों की स्थापना के संदर्भ में भी इसकी शिक्षाएँ आज अत्यंत प्रासंगिक हैं। इस प्रकार, कामायनी में निहित मानवीय संवेदनाएँ आज के यांत्रिक, तनावग्रस्त और आत्मविस्मृत समाज में नवचेतना एवं मार्गदर्शन प्रदान करने में सक्षम हैं।